Friday, April 16, 2021

सांसद अरुण साव ने लोकसभा में कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेलवे लाइन का मुद्दा उठाया

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बिलासपुर। सांसद अरुण साव ने शुक्रवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान एक बार फिर कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेलवे लाइन का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि 2018 में स्वीकृत इस परियोजना के कार्यों में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। रेल मंत्री जी इस नई रेल परियोजना में व्यक्तिगत रूप से रुचि ले कार्य में गति लावें।

कटघोरा से मुंगेली होते हुए डोंगरगढ़ तक 277 कि.मी. नई रेलवे लाइन बिछाने पूर्व में रेल मंत्रालय एवं छत्तीसगढ रेल कार्पोरेशन लिमिटेड की एक संयुक्त कार्य एजेंसी बनाई गई थी। सर्वे के अनुसार निर्धारित रूट पर नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था। वहीं मुंगेली जिले में जनसुनवाई भी की गई थी, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट के कार्यों में कोई नई प्रगति नहीं दिखाई दे रही है। आजादी के 74 वर्षों बाद भी रेल सुविधाओं से अछूते मुंगेली व कबीरधाम जिले के लोगों की इस बहुप्रतीक्षित मांग को सांसद श्री साव ने लोकसभा में एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया। वे इस मुद्दे को इससे पहले भी संसद में उठा चुके हैं। शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान श्री साव ने कहा कि देश की आजादी को 75 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं, लेकिन मुंगेली और कबीरधाम जिले की जनता आज भी रेल सुविधा के लिए तरस रही है।

मुंगेली में तो अंग्रेजों के शासनकाल में रेल लाइन बिछाने का काम प्रारंभ भी हो गया था, परंतु अंग्रेजी शासन के अंत के साथ ही वह योजना बंद हो गई। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में सरकार बनी तो राज्य की पूर्ववर्ती रमन सरकार व रेल मंत्रालय के बीच एमओयू करा 2018 में कटघोरा से मुंगेली होते हुए डोंगरगढ़ तक 277 कि.मी. नई रेलवे लाइन निर्माण के लिए मंजूरी दी गई। तब इस परियोजना की अनुमानित लागत 4821 करोड़ रुपए थी। स्वीकृति के इतने वर्षों बाद भी आज इस परियोजना के कार्यों में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी व रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में रेलवे का चहुंमुखी विकास हो रहा है। इसलिए उनकी रेल मंत्री जी से मांग है कि वे इस नई रेलवे लाइन के निर्माण में व्यक्तिगत रूप से रुचि लें, ताकि जल्द से जल्द यह परियोजना पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि मुंगेली व कबीरधाम जिले को रेल नेटवर्क से जुड़वाना पहले दिन से उनकी प्राथमिकता में है।

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उन्होंने कहा कि 2018 में स्वीकृत इस परियोजना के कार्यों में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। रेल मंत्री जी इस नई रेल परियोजना में व्यक्तिगत रूप से रुचि ले कार्य में गति लावें।

कटघोरा से मुंगेली होते हुए डोंगरगढ़ तक 277 कि.मी. नई रेलवे लाइन बिछाने पूर्व में रेल मंत्रालय एवं छत्तीसगढ रेल कार्पोरेशन लिमिटेड की एक संयुक्त कार्य एजेंसी बनाई गई थी। सर्वे के अनुसार निर्धारित रूट पर नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था। वहीं मुंगेली जिले में जनसुनवाई भी की गई थी, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट के कार्यों में कोई नई प्रगति नहीं दिखाई दे रही है। आजादी के 74 वर्षों बाद भी रेल सुविधाओं से अछूते मुंगेली व कबीरधाम जिले के लोगों की इस बहुप्रतीक्षित मांग को सांसद श्री साव ने लोकसभा में एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया। वे इस मुद्दे को इससे पहले भी संसद में उठा चुके हैं। शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान श्री साव ने कहा कि देश की आजादी को 75 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं, लेकिन मुंगेली और कबीरधाम जिले की जनता आज भी रेल सुविधा के लिए तरस रही है।

मुंगेली में तो अंग्रेजों के शासनकाल में रेल लाइन बिछाने का काम प्रारंभ भी हो गया था, परंतु अंग्रेजी शासन के अंत के साथ ही वह योजना बंद हो गई। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में सरकार बनी तो राज्य की पूर्ववर्ती रमन सरकार व रेल मंत्रालय के बीच एमओयू करा 2018 में कटघोरा से मुंगेली होते हुए डोंगरगढ़ तक 277 कि.मी. नई रेलवे लाइन निर्माण के लिए मंजूरी दी गई। तब इस परियोजना की अनुमानित लागत 4821 करोड़ रुपए थी। स्वीकृति के इतने वर्षों बाद भी आज इस परियोजना के कार्यों में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी व रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में रेलवे का चहुंमुखी विकास हो रहा है। इसलिए उनकी रेल मंत्री जी से मांग है कि वे इस नई रेलवे लाइन के निर्माण में व्यक्तिगत रूप से रुचि लें, ताकि जल्द से जल्द यह परियोजना पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि मुंगेली व कबीरधाम जिले को रेल नेटवर्क से जुड़वाना पहले दिन से उनकी प्राथमिकता में है।