होलिका दहन से पहले जान ले शुभ मुहूर्त…

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होलिका दहन से पहले जान ले शुभ मुहूर्त…

महेंद्र मिश्रा,,बिलासपुर ,भक्त प्रहलाद, हरिण्यकश्यप और उनकी बहन होलिका से जुड़ी होलिका दहन की पौराणिक कथा तो हम सभी जानते हैं. यही कारण है कि इस दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत से जोड़कर देखा जाता है. होलिका दहन का लाभ त्यौहार इस बार 28 मार्च रविवार को है और उसके अगले दिन 29 मार्च सोमवार को होली का त्योहार मनाया जाएगा. जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है, दहन से पहले कैसे करें पूजा, किस राशि वालों को होलिका की अग्नि में क्या अर्पित करना चाहिए, आज हम आपको ये पूरी जानकारी इस खबर में देंगे.

होलीका हन से पहले उसकी पूजा की जाती है. पूजन सामग्री में एक लोटा गंगाजल, रोली, माला, अक्षत, धूप या अगरबत्ती, पुष्प, गुड़, कच्चे सूत का धागा, साबूत हल्दी, मूंग, बताशे, नारियल एवं नई फसल के अनाज गेंहू की बालियां, पके चने आदि होते हैं.

इसके बाद पूरी श्रद्धा से होली के चारों और परिक्रमा करते हुए कच्चे सूत के धागे को लपेटा जाता है. होलिका की परिक्रमा तीन या सात बार की जाती है. इसके बाद शुद्ध जल सहित अन्य पूजा सामग्रियों को होलिका को अर्पित किया जाता है. इसके बाद होलिका में कच्चे आम, नारियल, सात अनाज, चीनी के खिलौने, नई फसल इत्यादि की आहुति दी जाती है.

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होलिका दहन से पहले जान ले शुभ मुहूर्त…

महेंद्र मिश्रा,,बिलासपुर ,भक्त प्रहलाद, हरिण्यकश्यप और उनकी बहन होलिका से जुड़ी होलिका दहन की पौराणिक कथा तो हम सभी जानते हैं. यही कारण है कि इस दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत से जोड़कर देखा जाता है. होलिका दहन का लाभ त्यौहार इस बार 28 मार्च रविवार को है और उसके अगले दिन 29 मार्च सोमवार को होली का त्योहार मनाया जाएगा. जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है, दहन से पहले कैसे करें पूजा, किस राशि वालों को होलिका की अग्नि में क्या अर्पित करना चाहिए, आज हम आपको ये पूरी जानकारी इस खबर में देंगे.

होलीका हन से पहले उसकी पूजा की जाती है. पूजन सामग्री में एक लोटा गंगाजल, रोली, माला, अक्षत, धूप या अगरबत्ती, पुष्प, गुड़, कच्चे सूत का धागा, साबूत हल्दी, मूंग, बताशे, नारियल एवं नई फसल के अनाज गेंहू की बालियां, पके चने आदि होते हैं.

इसके बाद पूरी श्रद्धा से होली के चारों और परिक्रमा करते हुए कच्चे सूत के धागे को लपेटा जाता है. होलिका की परिक्रमा तीन या सात बार की जाती है. इसके बाद शुद्ध जल सहित अन्य पूजा सामग्रियों को होलिका को अर्पित किया जाता है. इसके बाद होलिका में कच्चे आम, नारियल, सात अनाज, चीनी के खिलौने, नई फसल इत्यादि की आहुति दी जाती है.