मौत के साये में गुरूजी न सुविधा, न सुरक्षा कोविड टीकाकरण कार्य

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मौत के साये में गुरूजी
न सुविधा, न सुरक्षा कोविड टीकाकरण कार्य

राकेश खरे,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ओपी बघेल, प्रांतीय महामंत्री मनोज मिस्त्री, संभागाध्यक्ष बसंत जायसवाल व जिलाध्यक्ष बिलासपुर अरुण जायसवाल ने संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना महामारी का फैलाव अपने चरम पर है।देश में महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर आ गया है। इसके प्रकोप से मृत्यु दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है। कोविड 19 के टीकाकरण ड्यूटी में संलग्न शिक्षक भी कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे है। कुछ शिक्षक इस बीमारी के चलते काल के गाल में समा गए है। टीकाकरण ड्यूटी में लगे शिक्षकों को न तो समुचित मेडिकल किट मुहैया कराया गया है, न सुरक्षा की गारंटी, न तो ड्यूटी प्रमाणपत्र (पास) जारी किया गया है और न ही किसी प्रकार का भत्ता दिया गया है। मौत से बेख़ौफ़, भीड़ को पार करते, शिक्षक इस राष्ट्रीय हित के कार्य में पूरी तन्मयता से लगे हुए है। ई-पास के अभाव में लॉकडाउन के दौरान शिक्षको को घर से निकलने में परेशानी तो हो रही है साथ ही गाड़ी में पेट्रोल भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में ड्यूटी कैसे करें यह भी एक ज्वलंत समस्या है। और तो और कोरोना की वजह से किसी शिक्षक की मृत्यु हो जाने पर उसके परिवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी प्रकार से सहायता राशि भी मुहैया नहीं कराई जाती। इतनी कठिनाई के बाद यदि कोई शिक्षक कोविड ड्यूटी में नहीं पहुँच पाता है तो उस पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है इस पर शासन को इस ऒर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
संघ के ब्लॉक अध्यक्ष मस्तूरी सुरेंद्र डहरिया ने इस विज्ञप्ति के समर्थन में कहा कि यदि शासन शिक्षकों को आवश्यकतानुसार संसाधन, उनके स्वयं की सुरक्षा व परिवार का हित का ध्यान रखे व साथ ही बीमा कवर दे तो शिक्षक अपनी ड्यूटी दुगुने उत्साह से करेंगे।

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मौत के साये में गुरूजी
न सुविधा, न सुरक्षा कोविड टीकाकरण कार्य

राकेश खरे,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ओपी बघेल, प्रांतीय महामंत्री मनोज मिस्त्री, संभागाध्यक्ष बसंत जायसवाल व जिलाध्यक्ष बिलासपुर अरुण जायसवाल ने संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना महामारी का फैलाव अपने चरम पर है।देश में महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर आ गया है। इसके प्रकोप से मृत्यु दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है। कोविड 19 के टीकाकरण ड्यूटी में संलग्न शिक्षक भी कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे है। कुछ शिक्षक इस बीमारी के चलते काल के गाल में समा गए है। टीकाकरण ड्यूटी में लगे शिक्षकों को न तो समुचित मेडिकल किट मुहैया कराया गया है, न सुरक्षा की गारंटी, न तो ड्यूटी प्रमाणपत्र (पास) जारी किया गया है और न ही किसी प्रकार का भत्ता दिया गया है। मौत से बेख़ौफ़, भीड़ को पार करते, शिक्षक इस राष्ट्रीय हित के कार्य में पूरी तन्मयता से लगे हुए है। ई-पास के अभाव में लॉकडाउन के दौरान शिक्षको को घर से निकलने में परेशानी तो हो रही है साथ ही गाड़ी में पेट्रोल भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में ड्यूटी कैसे करें यह भी एक ज्वलंत समस्या है। और तो और कोरोना की वजह से किसी शिक्षक की मृत्यु हो जाने पर उसके परिवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी प्रकार से सहायता राशि भी मुहैया नहीं कराई जाती। इतनी कठिनाई के बाद यदि कोई शिक्षक कोविड ड्यूटी में नहीं पहुँच पाता है तो उस पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है इस पर शासन को इस ऒर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
संघ के ब्लॉक अध्यक्ष मस्तूरी सुरेंद्र डहरिया ने इस विज्ञप्ति के समर्थन में कहा कि यदि शासन शिक्षकों को आवश्यकतानुसार संसाधन, उनके स्वयं की सुरक्षा व परिवार का हित का ध्यान रखे व साथ ही बीमा कवर दे तो शिक्षक अपनी ड्यूटी दुगुने उत्साह से करेंगे।