श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी उत्सव गुरबाणी कथा सत्संग भक्ति पूर्वक ऑनलाइन मनाया

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श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी उत्सव गुरबाणी कथा सत्संग भक्ति पूर्वक ऑनलाइन मनाया

कमल दुसेजा,बिलासपुर,बाबा आनंद राम दरबार चकरभाटा के भक्ति योगी बाल भक्त स्वामी श्री कृष्ण दास उदासीन जी महाराज ने मीठी सरल गुरबाणी गाकर सत्संग कीर्तन किया और भक्त मखन शाह की सुंदर कथा बताई। भक्त मखन शाह एक व्यापारी था एक दिन पानी के जहाज में काफी सामान भरकर लौट रहा था कि अचानक तूफान आया और जहाज डूबने लगा साथियों ने बहुत प्रयत्न किया लेकिन परिस्थिति खराब हो गई अंततोगत्वा सब बल छोड़कर उसने अपने सतगुरु को याद किया श्री गुरु नानक देव महाराज जी के वंशावली की अरदास करके सच्चे दिल से प्रार्थना की,

सतगुरु आप मेरा बेड़ा पार करो मैं आपके चरणों में 500 स्वर्ण मोहरों की सेवा करूंगा मैं आपकी शरण हूं आपका दास हूं मैं निरबल हूं आप ही मेरे बल हो। आंखों में आंसू भरे सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती अचानक चमत्कार हुआ तूफान के बावजूद बेड़ा पानी से ऊपर उठा और सीधी राह चलने लगा सतगुरु का धन्यवाद किया और जब वापस अपने नगर आया तो अपने सतगुरु को खोजने लगा उस समय गुरु नानक देव महाराज जी की नौवीं पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज खुद को छुपा कर बैठे थे और भजन में लीन थे लेकिन उनकी जगह 22 नकली आदमी स्वयं सतगुरु बनकर बैठे थे। भक्त मक्खन शाह चिंता में पड़ गए उन्होंने हर नकली गुरु के आगे 5 स्वर्ण की मोहरें रखी पाखंडी उनका आदर कर रहे थे सत्कार कर रहे थे। भक्त मखन शाह के दिल को तसल्ली नहीं हुई तभी किसी गुरमुख ने बताया कि भाई एक महात्मा है जो एक जगह भक्ति कर रहे हैं उन्होंने खुद को बंद करके रखा है लोग उन्हें भाई तेगा कहकर बुलाते हैं तब भक्त मखन शाह अपने अपमान दुख की परवाह न करके उद्यम कर के अंदर गया और देखा कि सतगुरु प्रभु के सुमिरन में लीन हैं साक्षात प्रेम भक्ति वैराग्य की मूर्ति हैं। आकर चरणों में माथा टेका और सतगुरु के आगे भी सोने की केवल 5 मोहरे रखी तब सतगुरु ने नेत्र खोलें और बिना परिचय लिए कहने लगे भाई मक्खन शाह आओ हमारी पीठ देखो, देखा तो पीठ पर खरोंच आई हुई है रक्त लगा हुआ है सतगुरु का कुर्ता भीगा हुआ है। मक्खन शाह ने कहा यह कैसे हुआ सतगुरु! तब श्री गुरु तेग बहादुर साहब जी कहने लगे कि भाई मक्खन शाह भूल गया तुम्हारा बेड़ा हमने पार लगाया अपना कंधा देकर और तुम 500 का वचन देकर केवल पांच सोने की मोहरें रख रहे हो। तब भाई मक्खन शाह रोने लगे चरणों में गिर पड़े समझ गए कि यही सच्चे सतगुरु ब्रह्म ज्ञानी अंतर्यामी हैं और ढोल बजाकर जोर जोर से गाने लगे सतगुरु मिल गया सतगुरु मिल गया। ऐसी कथा भक्ति के द्वारा सर्व साध संगत भावविभोर हो गई। यह सत्संग कीर्तन ऑनलाइन किया गया सर्व साध संगत घर में ही श्रद्धा पूर्वक सत्संग कीर्तन श्रवण कर रही है। कुछ सेवादारी गायों की सेवा कर रहे हैं तो कुछ प्रभु के प्यारे इस समय लॉकडाउन में गरीबों को राशन पहुंचा रहे हैं। इस तरह सेवा की ज्योत जगा कर श्री कृष्ण दास जी ने सबको सेवा दान और नाम की प्रेरणा दी भाई विजय दूसेजा ने इस सत्संग का प्रचार किया। 7 मई को श्री वरुथिनी एकादशी महोत्सव भी ऑनलाइन भक्ति पूर्वक किया जाएगा जिसका प्रसारण संध्या 5:00 से 7:00 फेसबुक बाबा भगतराम चकरभाटा पर ऑनलाइन होगा

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श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी उत्सव गुरबाणी कथा सत्संग भक्ति पूर्वक ऑनलाइन मनाया

कमल दुसेजा,बिलासपुर,बाबा आनंद राम दरबार चकरभाटा के भक्ति योगी बाल भक्त स्वामी श्री कृष्ण दास उदासीन जी महाराज ने मीठी सरल गुरबाणी गाकर सत्संग कीर्तन किया और भक्त मखन शाह की सुंदर कथा बताई। भक्त मखन शाह एक व्यापारी था एक दिन पानी के जहाज में काफी सामान भरकर लौट रहा था कि अचानक तूफान आया और जहाज डूबने लगा साथियों ने बहुत प्रयत्न किया लेकिन परिस्थिति खराब हो गई अंततोगत्वा सब बल छोड़कर उसने अपने सतगुरु को याद किया श्री गुरु नानक देव महाराज जी के वंशावली की अरदास करके सच्चे दिल से प्रार्थना की,

सतगुरु आप मेरा बेड़ा पार करो मैं आपके चरणों में 500 स्वर्ण मोहरों की सेवा करूंगा मैं आपकी शरण हूं आपका दास हूं मैं निरबल हूं आप ही मेरे बल हो। आंखों में आंसू भरे सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती अचानक चमत्कार हुआ तूफान के बावजूद बेड़ा पानी से ऊपर उठा और सीधी राह चलने लगा सतगुरु का धन्यवाद किया और जब वापस अपने नगर आया तो अपने सतगुरु को खोजने लगा उस समय गुरु नानक देव महाराज जी की नौवीं पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज खुद को छुपा कर बैठे थे और भजन में लीन थे लेकिन उनकी जगह 22 नकली आदमी स्वयं सतगुरु बनकर बैठे थे। भक्त मक्खन शाह चिंता में पड़ गए उन्होंने हर नकली गुरु के आगे 5 स्वर्ण की मोहरें रखी पाखंडी उनका आदर कर रहे थे सत्कार कर रहे थे। भक्त मखन शाह के दिल को तसल्ली नहीं हुई तभी किसी गुरमुख ने बताया कि भाई एक महात्मा है जो एक जगह भक्ति कर रहे हैं उन्होंने खुद को बंद करके रखा है लोग उन्हें भाई तेगा कहकर बुलाते हैं तब भक्त मखन शाह अपने अपमान दुख की परवाह न करके उद्यम कर के अंदर गया और देखा कि सतगुरु प्रभु के सुमिरन में लीन हैं साक्षात प्रेम भक्ति वैराग्य की मूर्ति हैं। आकर चरणों में माथा टेका और सतगुरु के आगे भी सोने की केवल 5 मोहरे रखी तब सतगुरु ने नेत्र खोलें और बिना परिचय लिए कहने लगे भाई मक्खन शाह आओ हमारी पीठ देखो, देखा तो पीठ पर खरोंच आई हुई है रक्त लगा हुआ है सतगुरु का कुर्ता भीगा हुआ है। मक्खन शाह ने कहा यह कैसे हुआ सतगुरु! तब श्री गुरु तेग बहादुर साहब जी कहने लगे कि भाई मक्खन शाह भूल गया तुम्हारा बेड़ा हमने पार लगाया अपना कंधा देकर और तुम 500 का वचन देकर केवल पांच सोने की मोहरें रख रहे हो। तब भाई मक्खन शाह रोने लगे चरणों में गिर पड़े समझ गए कि यही सच्चे सतगुरु ब्रह्म ज्ञानी अंतर्यामी हैं और ढोल बजाकर जोर जोर से गाने लगे सतगुरु मिल गया सतगुरु मिल गया। ऐसी कथा भक्ति के द्वारा सर्व साध संगत भावविभोर हो गई। यह सत्संग कीर्तन ऑनलाइन किया गया सर्व साध संगत घर में ही श्रद्धा पूर्वक सत्संग कीर्तन श्रवण कर रही है। कुछ सेवादारी गायों की सेवा कर रहे हैं तो कुछ प्रभु के प्यारे इस समय लॉकडाउन में गरीबों को राशन पहुंचा रहे हैं। इस तरह सेवा की ज्योत जगा कर श्री कृष्ण दास जी ने सबको सेवा दान और नाम की प्रेरणा दी भाई विजय दूसेजा ने इस सत्संग का प्रचार किया। 7 मई को श्री वरुथिनी एकादशी महोत्सव भी ऑनलाइन भक्ति पूर्वक किया जाएगा जिसका प्रसारण संध्या 5:00 से 7:00 फेसबुक बाबा भगतराम चकरभाटा पर ऑनलाइन होगा